हिंदी फिल्मों में हीरो-हीरोइनों के मरने का रिवाज नहीं है। इसकी एक वजह है कि भारतीय काव्यशास्त्र में ट्रेजडी की अवधारणा नहीं है। अपने यहां दुखांत कलाओं को पसंद नहीं किया जाता। इसके इतर पाश्चात्य काव्यशास्त्र में ट्रेजडी पर जोर दिया गया। आरस्तू का विरेचन सिद्धांत ट्रेजडी को ही आधार बनाता है और शायद यही वजह है कि मशहूर नाटककार शेक्सपीयर के अधिकांश नाटक दुखांत हैं।
बहरहाल, कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाले सीरियल बालिका बधू की मुख्य नायिका आनंदी मर गई। उसे गोली मार दी गई। बालिका बधू ही वह सीरियल है जिसने एकता कपूर के अजर-अमर नायक-नायिकाओं और अनवरत, बारहमासी सीरियलों की बैंड बजाई। देखते-ही देखते कलर्स के आगे दूसरे मनोरंजन चैलनों का रंग फीका पड़ गया। उनकी टीआरपी कलर्स के बरक्श आधे पर ही ठहरती, खासकर बालिका बधू के प्रसारण के समय।
जैसा कि न्यूज़ चैनल वाले बता रहे थे कि देश सदमें में है, आनंदी के मरने से कम से कम मुझे सदमा नहीं लगा क्योंकि इस देश में आनंदियां तो रोज मरती हैं। जिन बाल विवाह और अनमेल विवाह जैसी समस्याओं को केंद्र में रखकर सीरियल की शुरुआत हुई, उसमें आनंदी जैसे किरदारों का मरना तो उनकी नियति है। ऐसी आनंदी, जो सासू मां की हां में हां मिलाने की जगह उससे सवाल करे। घर की इज्जत की परवाह किए बगैर छुट्टा घूमने की आदी हो, बात-बात में पति से भी झगड़ बैठे। मुझे लगता है कि आनंदी की मौत सही समय पर हुई है। निर्माता ज्यादा समय तक उसे जिंदा रखता तो सीरियल की एथेंटिसिटी मर जाती। बालिका बधू क्या, कलर्स में प्रसारित होने वाले सीरियल ऐसे हैं जो प्रेमचंद की कहानियों की याद दिलाते हैं। प्रेमचंद भी अपने पात्रों, खासकर केन्द्रीय पात्रों के साथ कोई हमदर्दी नहीं बरतते। चाहे आप गोदान के होरी को लें या रंगभूमि के सूरदास को या फिर निर्मला। घोर अत्याचार और बद से बदतर जिंदगी गुजारते हैं प्रेमचंद के पात्र। क्यों? क्योंकि भारतीय समाज का यही यथार्थ है। प्रेमचंद या बालिका बधू का निर्माता चाहता तो अपने केन्द्रीय पात्र को लंबे समय तक जिंदा रखता, उनकी जिंदगी को खुशहाल दिखाता लेकिन क्या ऐसा हमारे समाज में भी है?

par premchand ki kahaniyon mein punar janam ka concept nahi tha...bailka vadhu ki nayika ne serial ki popularity ko badhta dekh kar fees badhane ki mang kar daali hogi toh nirmata ko usse marna hi gawara laga hoga...sasti balika wadhu khoj kar uska punar janm kara leinge samay aane par!
ReplyDeletebilkul sahi kaha aapne.... aur ab suna hai ki aanandi zinda hai... use bacha liya gaya hai. ye us roz serial dekhne ke bad twarit pratikriya thi.
ReplyDelete