Monday, January 12, 2009

उमर के वादे और वादी का सच

जम्मू-·श्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में उमर अब्दुल्ला की ताजपोशी हो चुकी है। राज्य को नये साल में 'नये खूनÓ का सीएम मिल गया है। महज 38 बरस में सीएम बनना उमर की कम, राज्य की जनता की उपलब्धि ज्यादा है, वरना भारतीय राजनीति में तो नेता 50 के बाद ही जवान माना जाता है। राजनीति में युवा 'दाल में नमकÓ के बराबर हैं। जो हैं वे उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। राहुल गांधी बड़े आइकान हैं। सचिन पायलट, नवीन जिंदल, वरुण गांधी और मानवेंद्र को गिना भी जा सकता है। इनके अलावा अभिनेता से नेता बने गोविंदा को राजनीति में भी मसखरी सूझती है। जवान होते हुए भी जानें क्यों ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद को वरिष्ठ दिखाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उमर का मुख्यमंत्री चुना जाना 'जवान भारतÓ के लिए एक आशा की किरण है। जम्मू-कश्मीर चुनाव परिणामों के बाद दस जनपथ में उमर के नाम पर मुहर लगते ही उन्होंने राज्य के विकास का वादा किया> उन्होंने राज्य की जनता को बिजली-पानी-सड़क मुहैया कराने की बात कही है। अपने वादे में वह कितना खरे उतरते हैं, यह तो भविष्य के गर्त में है लेकिन सूबे के मुखिया के तौर पर उनकी डगर काँटों भरी होगी, यब बात वह भी जानते हैं।यह बात बिल्कुल साफ है की नेशनल कांफ्रेंस ने राज्य में इस बार उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में चुनाव लड़ा था। उनके पिता फारूख अब्दुल्ला नेपथ्य में सूत्रधार की भूमिका में थे। पिछली दफा मिली (28) सीटों में पार्टी भले इजाफा न कर सकी हो लेकिन बेटे ने फारूख साहब को यह जतला दिया की अब्बू जान देखिये आगे-आगे होता है क्या! इस बार के चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस को जो भी हासिल हुआ उसकी क्रेडिट का हकदार यह चमकता सितारा ही है। बेशक उमर फ्रेश हैं, नये हैं। उनकी चाल-ढाल और सोच नयी है। उन्हें पता है ·ि इस पुराणपंथी हिन्दुस्तान की आधे से ज्यादा आबादी नयी और नये सोच वाली है। उमर ने उसे पहचाना और उसे भुना लिया। अभी छह महीने भी तो नहीं बीते। 'करार पर तकरारÓ के चलते मनमोहन kओ संसद में बहुमत साबित करना था। सदन में उमर भी मौजूद थे। उन्हें भी ·ुछ बोलना था, बोले भी। उन·े बोलते वक्त ·ुछ 'हाफ पैंटÓ वाले 'हां-हूंÓ ·र रहे थे। उस रोज उमर ने ·हा था ·ि वह पहले हिन्दुस्तानी हैं, बाद में मुसलमान और मुसलमान होना ·ोई गुनाह नहीं। उन·ा यह भी ·हना था ·ि जम्मू-·श्मीर ·ो हमेशा से हाशिये पर रखा गया। अब वक्त आ गया है ·ि दिल्ली उसे भी अपनों ·ी तरह देखे। अब जब·ि उमर मुख्यमंत्री बन चु·े होंगे उन्हें तमाम झंझावातों से जूझना होगा। उन·े सामने तो सबसे बड़ी चुनौती यही होगी ·ि ·ांग्रेस के साथ सही-सही निभ जाए। यह बात सही है ·ि राज्य में नेशनल ·ॉन्फ्रेंस और ·ांग्रेस के बीच तालमेल ठी·-ठा· रहा है। पहले शेख अब्दुल्ला, फिर फारूख अब्दुल्ला ने मिल·र ·ाम ·िया है। अब उमर ·ी बारी है इसलिए उन्हें यह बात जेहन में रखनी होगी ·ि पिछली बार ·ांग्रेस ने उन·ी ·ा दामन छोड़ पीडीपी से हाथ मिलाया था। यह बात अलग है ·ि तीन-तीन साल त· अपने-अपने मुख्यमंत्री बैठाने ·ी शर्त के साथ बनी मुफ्ती सर·ार ने ·ांग्रेस ·ा वक्त आने पर उस·ो ठेंगा दिखा दिया था। ·ाफी मान-मन्नौवल के बाद गुलाम नबी आजाद ·ी ताजपोशी हुई थी। और चुनाव ·ा वक्त आते ही अमरनाथ मुद्दे पर फिर ·िनारा ·र लिया।उमर यह न भूलें ·ि वह ·ितने ही 'लिबरलÓ हो जाएं, राज्य में भाजपा जैसी ता·तें हैं। ए· से ग्यारह सीट के आं·ड़े पर पहुंची भाजपा अपने ति·ड़मों से उन्हें बख्शेगी नहीं, यह तय है। वादी में पहली बार दहाई के आं·ड़े में पहुंचने से उत्साहित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशो· खजूरिया ने तो ऐलान ही ·र दिया है ·ि उन·ी पार्टी भविष्य में भी अमरनाथ मुद्दे ·ो जिंदा रखेगी और राष्ट्रवाद उनके एजेंडे में शामिल होगा। ऐसी पार्टियां ·िस धार्मि· मुद्दे ·ो ·ब ·िस रूप में तूल दे·र उन्माद फैला दें, ·ुछ नहीं ·हा जा स·ता। नजीर सामने है- चार महीने पहले ·ा जम्मू-·श्मीर।चुनाव-परिणामों के बाद विश्लेष·ों ·ा जिस तरफ ध्यान नहीं गया, उमर ·ो उस तरफ भी 'ब·ोध्यानÓ रखना होगा। चुनावों ·ा बहिष्·ार ·रने वाले हुर्रियत ·ॉन्फ्रेस और जम्मू-·श्मीर लिबरेशन फ्रंट जैसे दल अपनी खिचड़ी प·ाने से नहीं चू·ेंगे। आज ·ी तारीख में जमींदोज हुए मीर वाइज उमर, यासीन मलिक और अब्दुल गनी बट्ट जैसे 'घाघÓ कश्मीर की स्वायत्तता के नाम पर घाटी की अवाम का कान भरने की भरसक कोशिश करेंगे।एक जो सबसे जरूरी बात है, वह उमर के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। आतंकवाद 'जन्नत के स्वर्ग का ऐसा जिन्न है जिसके नासूर से राज्य कभी उबर नहीं सका आये दिन लहूलुहान होती वादी ने वहां के लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। वादी की फिजा में वो मोहिनी शक्ति है कि पर्यटन से राज्य खजाना कभी खाली न होने दे लेकिन पर्यट· वहां जाने की जुर्रत तो करें। उमर अब्दुल्ला अगर आतंक पर नकेल कसने में कामयाब रहते हैं तो यह उनके राजनीतिक करियर में 'प्लस पॉइंट होगा। अब जबकि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर लगातार वैश्विक दबाव बनता जा रहा है और दिल्ली भी कुछ-कुछ जाग सी गयी है, उमर के पास मौका है कि वह अपनी इच्छा-शक्ति से वादी में मुस्कान लौटा दे।

6 comments:

  1. nicely written.. "mahaz 38 sal ki umr me Umar ka chief minister banna unki kam aur janta ki zyada uplabhdhi hai"..lekin ab to aage hi dikhega k is uplabdhi se Janta ko faida kitna milta hai.. janta ko milnewali uplabdhi kahin sirf Umr ko milne wali uplabhdhi tak hi simit na rah jaye..iske liye hum sirf Wadi k logo k liye dua kr sakte hain.. isliye k ye kahna Mushkil hai k kashmir aur bechare kashmiriyo ko kaun janjaal se nikalne me kamyab hoga aur wo bhi kaise!
    Kashmir jisko Duniya ki jannat kaha ja sakta hai, kis tarah Bharat aur Pakistan ki kuch Maukaparast aur Matlabi political parties ki wajah se Dozakh se kam nahi ban gayi hai... Khauf aur Sasti zindagi ko lekar Kashmiri jayen bhi to kahan...kuch jo apna pyara kashmir chodne ki himmat kr chuke hain pr aj bhi unki ankho me apne pyare watan k liye aur Apno k liye ansu dekhe ja sakte hain..
    bas hum dua kr sakte hain k Dashatgard aur firkaparast taakten kamzor pad jayen..Aur Umar Janta k hauslon ko barkrar rakhte hue wo kr dikhayen jo log unse umeed kr rahe hain..warna mere khyal se to J&K ki chief ministership desh ki sabse bhaari chunautiyo me se hai.

    Nazia Hasnain,
    Virat Vaibhav.

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  2. patrakarita mein pahuchate hi lagta hai aapko bhi psuedo secularism ka bukhar lag hi gaya...umar abdulla ka power mein aana nishit taur par swagat yogya kadam hai, der se hi sahi rajnitiki tarunai mein todi bahut jawani bhi aa rahi hai warna budhe aur beemar logon ko ham sab mil kar gaali dene ke siwa kar bhi kya sakte the. mai kisi party visesh mein interest toh nahi rakhta par firkaparti waali baat par kahna chahunga ki burai kya hai firkaparasti mein, kisi na kisi ki dandi pakad kar aage to badhna hi hoga; kisi vidwan ki bhasha mein, accha ho hum ram ko hi nahi ram ki bhi maane, kuran ko hi nahi kuran ki bhi maane. bhala ladne marne ko kaun kahta hai inme se, kam se kam maine toh aaj tak aisa kuch nahi padha.

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  3. manish ji thodi der se hi sahi lekin apne achi shuruvat ki,iske liye bahut badhai. apki khurpenchi phale-phule.

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  4. we the people of india may hope only that umar will give a good governance.umar has some dreams about the nation as told.

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  5. manish ji
    thare are so many forces working in j&k like secular democratic semi-secular also sepratist who want a seprate territory from indian entity.in recent scenario it is clear in which force the comman men trust.now umar will give better govt

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  6. manish ji 'aapka mat kaho aakash me kuhara ghana hain ........'blog pada achcha laga.par khuchh asahamatiyan hain.pahali bat to yah ki sahitykoron ka patrakarita se purana bair nahi hai.bhartenduyug se lekar ab tak k sahitykaron ka itihas raha hai ki ve sahity aur patrakarita dono k madham se samaj ki seva ki.akabar allahabadi ne kaha tha ki jab top mukabil ho to akhbar nikolo.dusari bat yah ki etihas se judana 'atitjivi' nahi hona hota hai.mai nahi kah raha hun ki etihas ko duharaya jay lekin etihas se sikh li ja sakati hai.aap patrkarita se jude hai aur dekhate hogen ki sanchar madhamon me kaun si ghatnayen chhayi rahati hai.kisonon ki aatmhatya ho ya ladayi 'etyadi'bankar rah jate hai........bahar
    baharhal aap suruvat achha kiyen hai.mery badhae swikar karen.


    Ram Chandra Pndey

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