Monday, January 18, 2010
अंतहीन सवालों से जूझना है तसलीमा जी
17 जनवरी यानी रविवारी जनसत्ता के एडिट पेज पर तसलीमा नसरीन का स्तंभ छपा है। शीर्षक है- देह का विकृत उत्सव। स्तंभ की यह दूसरी किस्त ही है। इससे पहले 10 जनवरी वाले अंक में ज्योति बसु से मुलाकात और उनकी दरियादिली पर लिखा था। बसु तब जीवित थे और उनकी खराब सेहत पर तसलीमा ने चिंता जाहिर की थी।
बहरहाल, दूसरी किस्त के साथ हुई है तसलीमा की धमाकेदार एन्ट्री। इस बार का विषय है इंटरनेट पर पसरी पोर्नोग्राफी। सेक्स और सेक्स पर मर्दवादी नजरिए की मुखालफत की है लेखिका ने। तसलीमा ने चिंता जाहिर की है कि पति परमेश्वर लोग पत्नियों को अंधेरे में रखकर वीडियो बनाते हैं। कई बार अगर पत्नियों को पता चल जाए कि वीडियो या तस्वीरें ली जा रही हैं और वह उसका कारण पूछती है तो कहा जाता है व्यक्तिगत संग्रह के लिए और फिर उसे बेच दिया जाता है, फलत: अपलोड कर दिया जाता है इंटरनेट पर।
बकलम तसलीमा, ये लोग पत्नियों से कहते हैं- 'अब ब्लाउज खोल कर फेंक दो, छाती पर हाथ फेरो और फटाफट साड़ी उतारो और टांगे फैला कर सो जाओ। धत्तेरे की मेरे सामने शर्म कैसी! मगर फिर भी लड़की को शर्म आती है। अपने पति के सामने भी वे सब काम करने में उसे झिझक होती है। लेकिन पति उसे समझाता है, शास्त्रों में लिखा है एक बार भगवान का भी आदेश न मानो तो चलेगा लेकिन पति का कहा न मानने पर रौरव नरक मिलता है। धीरे धीरे पत्नी को शर्म छोडऩी पड़ती है, घर में पति के अलावा और कोई है भी तो नहीं। लेकिन वह लक्ष्य करती है कि आज पति का व्यवहार सामान्य नहीं है। पत्नी को अलग-अलग ढंग से अपने सभी छोटे-बड़े अंगों को चूमने-चबाने का आदेश देता है। कैमरे को इस ढंग से जमा रखा है कि बिस्तर पर सोने के बाद पत्नी के रोम कूप तक उसमें देखे जा सके'। इसके बाद पत्नी के शरीर को तोड़-मरोड़, मीस-मसल कर जैसे चाहता, भोगता है।'
ेनिश्चय ही सेक्स के प्रति पुरुषों की पाश्विक प्रवृत्ति और उसे धंधा बनाने की चालबाजियों से तसलीमा आहत हैं। हम सबको आहत होना चाहिए, जो आधी दुनिया-आधा हक के पक्षधर हैं। इससे बचने का तसलीमा ने एक रास्ता सुझाया है- प्रतिकार का। उन्होंने अमेरिकी महिला लोरेना बबिट का हवाला दिया है। लोरेना बबिट भी अपने पति की वहशियाना हरकतों से आजिज आ गई थी। जब उससे और अधिक सहन नहीं हुआ तो एक रात को सोते समय उसने अपने पति का जननांग ही काट लिया और बाहर कहीं खेत में फेंक आई। हालांकि, जननांग को बाद में जोड़ लिया गया था। निश्चय ही इस अवैध कारोबार के प्रति माहिलाओं-कमसिन युवतियों का प्रतिकार एक कारगर उपाय हो सकता है लेकिन अभी इस सवाल का जवाब ढूंढ़ा जाना बाकी है कि जो लड़कियां या महिलाएं धन की लालच में खुशी-खुशी इस 'काम' में हाथ बंटाती हैं, उसका हल क्या हो सकता है?
इस हाड़ कंपाती ठंड में तसलीमा के साप्ताहिक स्तंभ का हिंदी पाठक गर्मजोशी से स्वागत करता है... वेल डन।
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