Wednesday, February 24, 2010

सचिन के कारनामे पर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ

...तो आखिरकार सचिन ने सईद अनवर का रिकॉर्ड तोड़ ही दिया। वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक! समूचा देश खुश है, मैं भी हूं। ...लेकिन सच पूछिए तो सचिन के इस कारनामे पर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। यह तो होना ही था। पहले भी तो दो-तीन दफा सचिन ड्योढ़ी तक पहुंच ही गए थे। तारीख 21 मई 1997 को चेन्नई में बना सईद अनवर का जो रिकॉर्ड 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर में टूटा, बहुत पहले टूट जाना चाहिए था। मुझे इस बात का पूरा भरोसा था कि ऐसा कारनामा सचिन जैसा खिलाड़ी ही कर सकता है।
लोगों को शायद याद न हो लेकिन जिस मैच में सईद अनवर ने 194 रन बनाए थे उसमें भारतीय टीम की कमान सचिन के पास ही थी और इसे संयोग ही कहेंगे कि सचिन की ही गेंद पर अनवर को गांगुली ने लपका था। मुझ जैसे देश के अधिकांश क्रिकेट प्रेमियों ने अनवर की उस पारी के बाद टेलिविजन सेट छोड़ दिया था, तोड़ दिया था और जीत की उम्मीद छोड़ दी थी। आखिर उस वक्त वनडे 327 रन बनना मायने रखता था। अनवर ने 22 चौकों और पांच छक्कों की मदद से 146 गेंदों में वो रन बनाए थे। सचिन ने 147 गेंदों में 25 चौकों और तीन छक्कों के साथ यह दोहरा शतक पूरा किया। अनवर को उस पारी में 19वें ओवर से आखिर तक रनर की जरूरत पड़ी थी मगर सचिन तेंदुलकर पूरे 50 ओवर खेले और आखिर तक बगैर किसी रनर के दौड़े।
बहरहाल, दो मायनों में सचिन की यह पारी मुझे खास लगती है। पहला, अप्रैल में जिंदगी के 37 साल पूरे करने जा रहे इस शख्स को कहां से ऊर्जा मिलती है, सोचने वाली बात है। ज्यादातर तो 15 ओवर खेलने के बाद ही हांफने लगते हैं। सचिन के इस स्टेमिना को सलाम तो करना ही होगा। दूसरा, मैन ऑफ द मैच का खिताब लेने के बाद अनवर ने पारी को 'खास' बताया था, बस। सचिन ने भी अपनी पारी को खास बताया लेकिन यह कहने में संकोच नहीं किया कि यह दोहरा शतक राष्ट्र को समर्पित है। सचिन की यही अदा उन्हें एक क्रिकेटर और एक खिलाड़ी से अलग एक भद्र इंसान बनाती है। यूं, किसी चैनल पर कल लता मंगेशकर ने भी कहा था कि सचिन एक खिलाड़ी से बढ़कर एक अच्छे इंसान हैं जो कामयाबी और शोहरत के बावजूद झुकना जानते हैं। यहां एक बात और याद आती है कि दो साल पहले कंमेंट्री बॉक्स में बैठकर बड़बड़ करने वाले संजय मंजरेकर और वकार युनुस जैसे लफ्फाज क्या अब भी यह कहने की हिम्मत जुटा पाएंगे कि सचिन बुढ़ा गए हैं और उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए। याद रहे भाई लोगो, सचिन ने पिछले दो टेस्ट मैचों में लगातार दो शतक बनाए हैं और वनडे की श्रेष्ठ पांच पारियों में से तीन पिछले 12 महीने में खेली हैं।
रिकॉर्ड तो बनते-टूटते रहेंगे। फिलवक्त हम सब यादगार इतिहास के साक्षी बने हैं। इसे खुशी से जी लें, इतना बहुत है।

2 comments:

  1. समस्या हमारे लोगों के शोर्ट टर्म मेमोरी-लास की है...देश अगर ६ महीने बाद होने वाले २०-२० क्रिकेट वर्ल्ड-कप से फिर पिछली बार की तरह बहार हो गया तोह यही लोग जो उनकी पूजा कर रहे हैं...सरेआम गरियाते मिलेंगे

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  2. Mujhe achhi tarah se yaad hai wo lagataar 3 sixes anil kumble ki ball par. ek ek six seedhe dil ko chot pahuncha raha tha. pichhle 13 saalo se mai badi besabri se intezaar kar raha tha ki koi Indian ye record tode. Sachin ne na keval record toda balki double century bhi laga di. Dil ko bahut sukoon pahuncha.

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